क्या एक ही समय पर कोई महिला किसी पुरुष की 'पत्नी' भी हो सकती है और उसके खिलाफ 'बलात्कार' की पीड़िता भी? राजस्थान हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक और बेहद कड़ा फैसला सुनाते हुए इस कानूनी विरोधाभास पर न सिर्फ लगाम लगाई है, बल्कि इसे कानूनी प्रक्रिया का खुला दुरुपयोग भी माना है। जस्टिस अनूप कुमार ढंड की एकलपीठ ने साफ शब्दों में व्यवस्था दी है कि यदि शादी वैध है और विवाह के समय पत्नी बालिग (18 वर्ष से ऊपर) थी, तो पति के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा किसी भी सूरत में नहीं बनता।
कोर्ट ने दो अलग-अलग मामलों में दर्ज बलात्कार की FIR को खारिज करते हुए तल्ख टिप्पणी की कि 'फैशन' बन चुकी ऐसी फिजूल की मुकदमेबाजी के कारण ही अदालतों में मुकदमों का अंबार लगा है और असली पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी हो रही है।
दहेज और रेप केस, एकसाथ कैसे?
हाईकोर्ट के सामने एक ऐसा अजीबोगरीब मामला आया जहां पत्नी ने पति पर दहेज प्रताड़ना और बलात्कार दोनों केस ठोक दिए थे। इस पर कोर्ट ने कानून का आईना दिखाते हुए कहा कि अगर तुम्हारे साथ बलात्कार हुआ था, तो तुम उसकी पत्नी नहीं हो सकतीं। और अगर तुम दहेज प्रताड़ना का केस डाल रही हो, तो तुम पत्नी के रूप में अधिकार मांग रही हो। कानून को इस तरह मजाक बनाकर विरोधाभासी एफआईआर दर्ज कराने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
जब मन बदला, तो लगा दिया 'रेप' का आरोप
साल 2021 में एक कपल ने रजामंदी से शादी की और रजिस्ट्रेशन भी कराया। बाद में अनबन हुई, तो पति साथ रहने की गुहार लगाने कोर्ट पहुंचा और पत्नी तलाक मांगने। जब बात नहीं बनी, तो पत्नी ने पति पर सीधा बलात्कार का केस दर्ज करा दिया। कोर्ट ने कहा कि साफ दिख रहा है कि शादी सहमति से हुई थी, बाद में मन बदला तो 'रेप' का हथियार इस्तेमाल कर लिया गया। वहीं दूसरी तरफ साल 2020 में आर्य समाज में एक विवाह हुआ। विवाद के बाद पत्नी ने दो थानों में दो अलग कहानियां लिखवाईं। एक जगह बलात्कार की और दूसरी जगह दहेज की। कोर्ट ने इसे कानूनी प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग मानते हुए खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की ढाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक 'नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत संघ' मामले का हवाला देते हुए याद दिलाया कि न्यायपालिका की पवित्रता बनाए रखना सबका कर्तव्य है। कोर्ट ने कड़ा संदेश दिया है कि वैवाहिक विवादों को आपसी सहमति या सही कानूनी तरीके से सुलझाया जाना चाहिए, न कि कानून को बदला लेने का औजार बनाकर।
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